जानिए क्रेडिट स्कोर क्या होता है और इसका महत्व | क्रेडिट स्कोर की पूरी जानकारी

क्रेडिट स्कोर क्या होता है
क्रेडिट स्कोर क्या होता है

क्रेडिट स्कोर के बारे में आपने कई बार सुना होगा, लेकिन आपको अभी भी पता नहीं की, क्रेडिट स्कोर क्या होता है? तो आपको यह जान लेना चाहिए। क्यों की आज के दौर में वित्तीय लेनदेन के लिए क्रेडिट स्कोर काफी जरुरी हो गया है। और एक अच्छा क्रेडिट स्कोर आप के लिए फायदेमंद साबित होता है।

अगर आप क्रेडिट स्कोर के बारे में विस्तार से जानकारी चाहते है तो हमारा यह आर्टिकल पढ़ें, जिसमें आप क्रेडिट स्कोर की विस्तारित जानकारी प्राप्त कर सकते है। जैसे,

इन सभी बातों को आप इस आर्टिकल में विस्तार से जानेंगे, और साथ ही आपके चुनिन्दा सवालों के जवाब भी इस आर्टिकल के अंत में आप को मिल जायेंगे। 

क्रेडिट स्कोर क्या होता है (What is a credit score in hindi)

क्रेडिट स्कोर को हमारे विश्वसहर्ता के मापन के तौर पर समझा जा सकता है। जो किसी भी तरह के वित्तीय लेनदेन के लिए जरूरी है। जैसे आप किसी से उधार लेते है और समय पर उसे लौटाते है तो आप का वित्तीय व्यवहार पारदर्शक माना जाता है, जिस पर आपको तिन अंकीय स्कोर प्रदान होता है, जो आपके पारदर्शकता की वैल्यूएशन है। इसे ही हम क्रेडिट स्कोर कहते है।

और फिर जब भी आप किसी तरह का उधार या लोन चाहते है तो आपके क्रेडिट स्कोर को देखते हुए आप को तुरंत बिना किसी परेशानी के उधार या लोन प्राप्त होता है। इस तरह से आपका क्रेडिट स्कोर आप के लिए फायदेमंद साबित होता है।

क्रेडिट स्कोर क्या होता है

क्रेडिट स्कोर क्या है?

मान्यता प्राप्त संस्था द्वारा आपके आर्थिक लेनदेन, बैंकिंग व्यवहार, लोन पुनर्भुगतान, क्रेडिट कार्ड का उपयोग जैसे वित्तीय रिकॉर्ड का मुल्यांकन कर आपको अंकीय स्कोर प्रदान किया जाता है, उसे क्रेडिट स्कोर कहते है।

क्रेडिट स्कोर का क्या मतलब है?

क्रेडिट स्कोर को हम हमारी वित्तीय सांख कह सकते है, जो यह निर्धारित करती है की, हमें कितने ब्याजदरों पर अधिकतम या न्यूनतम कितनी राशि मिल सकती है। आमतौर पर क्रेडिट स्कोर को चार स्तर पर नापा जाता है, जैसे, सर्वोत्तम, अच्छा, साधारण और बुरा। जिसे 300 से लेकर 900 अंकों तक निर्धारित किया जाता है। जहाँ 900 सर्वोत्तम क्रेडिट स्कोर है तो 300 बुरा क्रेडिट स्कोर माना जाता है। यह क्रेडिट अंक आपके वित्तीय लेनदेन, शेयर्स, बाँड, म्यूच्यूअल फंड्स, सर्टिफिकेट ऑफ़ डिपाजिट में आपकी स्थिति का निर्धारण करते है।

कौन सी कंपनियां हमारा क्रेडिट स्कोर दर्शाती है? और क्यों? 

आपके मन में यह सवाल जरुर आया होगा की आखिर क्रेडिट स्कोर को कौन निर्धारित करता है। तो उसका जवाब है की अलग-अलग देशों में सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त कुछ कंपनियां इसका निर्धारण करती है। जैसे, हमारे देश में क्रेडिट इंफॉर्मेशन ब्यूरो (इंडिया) लिमिटेड (CIBIL), CRIF हाई मार्क क्रेडिट इंफॉर्मेशन सर्विसेज प्रा. लिमिटेड, इक्विफैक्स इंक,और एक्सपेरियन इन कंपनियों को क्रेडिट स्कोर का निर्धारण करने के लिए मान्यता प्राप्त है। जिसमें CIBIL और CRIF इन दोनों क्रडिट ब्यूरो को रिज़र्व बैंक द्वारा अनुमोदित किया गया है। इन कंपनियों द्वारा जुटाए गये क्रेडिट रिपोर्ट और प्रदान किये गये क्रेडिट स्कोर का उपयोग बैंकों तथा लोन देनेवाली संस्थाओं द्वारा किसी व्यक्ति की वित्तीय पारदर्शकता को जानने के लिए किया जाता है। 

यह लाइसेंस प्राप्त कंपनियां व्यक्ति द्वारा किये गये वित्तीय लेनदेन की जानकारी जुटाती है, और उस व्यक्ति को व्यक्तिगत तौर पर क्रेडिट रेटिंग और क्रेडिट स्कोर प्रदान करती है। जब कोई व्यक्ति लोन लेने के लिए किसी बैंक या लोन संस्थाओं के पास जाती है। तब बैंक और लोन देनेवाली कंपनियां उस व्यक्ति से सम्बन्धित उपरोक्त कंपनियों के क्रेडिट रेटिंग और क्रेडिट स्कोर को चेक करती है। और उसपर निर्धारित करती है की उस व्यक्ति को लोन प्रदान किया जाना चाहिए या नहीं, या कितनी सीमा तक लोन प्रदान किया जा सकता है। 

क्रेडिट स्कोर के महत्वपूर्ण फैक्टर क्या है?

अब हम बात करते है उन महत्वपूर्ण फैक्टर की जिनपर हमारा क्रेडिट स्कोर कम या ज्यादा होता है। यह देखना इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्यों की, हमें मिलनेवाले लोन पर इसका सीधा प्रभाव पड़ता है, आपका क्रेडिट स्कोर ही यह निर्धारित करता है की आपको कितने अधिकतम राशी तक लोन सुविधा मिल सकती है? साथ ही आपके लोन पर लगनेवाले ब्याजदरों पर भी क्रेडिट स्कोर का प्रभाव होता है। इसलिए क्रेडिट स्कोर को प्रभावित करनेवाले फैक्टर महत्वपूर्ण हो जाते है।

वित्तीय लेनदेन का रिकॉर्ड 

इसे महत्वपूर्ण फैक्टर माना जाता है, जो आपके क्रेडिट स्कोर पर सीधे तौर पर असर करता है। अगर आप किसी बैंक या उधार देनेवाली किसी अन्य संस्था से लोन लेते है, तो आप रेगुलर और समय पर EMI का भुगतान करते है तो आपके क्रेडिट स्कोर पर इसका पॉजिटिव असर पड़ता है, जिस से आपका क्रेडिट स्कोर बढ़ता है।

लेकिन आप के लोन चुकाने में कई खामिया है, जैसे आप सही समय पर EMI का भुगतान नहीं करते, या किसी कारण आपको दण्डित किया जाता है, तो इसका सीधा नकारात्मक असर आपके क्रेडिट स्कोर पर होता है।

सुरक्षित और असुरक्षित लोन 

सुरक्षित और असुरक्षित लोन का भी आपके क्रेडिट स्कोर पर असर दीखता है, जैसे यदि आप होम लोन या ऑटो लोन, गोल्ड, प्रॉपर्टी लोन लेते है जिसमें सुरक्षा की गारंटी रखी गयी है, ऐसा लोन सुरक्षित लोन के अंतर्गत आता है, जिसमें तकनिकी या मैनेजमेंट खामियां नहीं होती, जो आपके क्रेडिट स्कोर को बढ़ाने के तौर पर देखा जाता है। 

लेकिन असुरक्षित लोन जिस में क्रेडिट कार्ड और व्यक्तिगत लोन के तौर पर देखा जा सकता है, जिसमें सुरक्षा के तौर पर किसी तरह की गारंटी नहीं होती। ऐसे लोन सुविधा में कई तरह की मैनेजमेंट खामिया सामने आती है जो क्रेडिट स्कोर पर ससार डालती है।

अगर आप दोनों तरह से लोन लेते है तो आपका क्रेडिट मिक्स देखा जाता है, जिस से आपके क्रेडिट स्कोर का निर्धारण होता है।

क्रेडिट हिस्ट्री 

यह भी एक महत्वपूर्ण फैक्टर है, क्यों की आपके क्रेडिट हिस्ट्री के बेस पर ही आपका क्रेडिट स्कोर तय किया जा सकता है। अगर आपने किसी से वित्तीय व्यवहार किया ही नहीं तो कोई आप का आकलन कैसे करेगा की आप अपने वित्तीय व्यवहार में अच्छे है या बुरे। 

वास्तव में क्रेडिट हिस्ट्री का ना होना आपके क्रेडिट स्कोर पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। लेकिन यह आपके ख़राब रिकॉर्ड से थोडा अच्छा माना जाना चाहिए। लेकिन जब तक आपके वित्तीय व्यवहार की समीक्षा नहीं की जा सकती तब तक आपका क्रेडिट स्कोर तय नहीं हो पायेगा।

लोन लिमिट या क्रेडिट कार्ड लिमिट 

आपने लिए हुए लोन पर बार-बार लिमिट का बढना और ड्यू लगना, साथ ही आपके क्रेडिट कार्ड पर लिमिट लगना आपके क्रेडिट स्कोर पर नकारात्मक प्रभाव डालता है।

क्रेडिट स्कोर कैसे काम करता है?

क्रेडिट स्कोर हमारे वित्तीय पारदर्शकता और साख को दर्शाता है, जिससे हमें बैंक या अन्य निजी संस्थाओं से लोन मिलने की आकाँक्षाओं को बल मिलता है। अगर क्रेडिट रिपोर्ट के अनुसार हमारी वित्तीय साख मजबूत है और हमने अच्छा क्रेडिट स्कोर प्राप्त किया है तो यकीनन कम ब्याजदरों के साथ अधिक लोन पाने में हम सक्षम होते है। 

उपरोक्त जानकारी में हमने यह जाना है की हमारे देश में कुल चार क्रेडिट ब्यूरो द्वारा हमारे बैंक या अन्य निजी लोन संस्थाओं के रिकॉर्ड के आधार पर हमें क्रेडिट स्कोर प्रदान करते है। जिस पर हमे मिलनेवाला लोन और उसपर लगनेवाली EMI तय होती है। अगर आप अच्छे से सर्वोत्तम क्रेडिट स्कोर की तरफ बढ़ रहे है तो यक़ीनन कोई भी बैंक या निजी संस्था आप को अधिक लोन सुविधा कम ब्याजदरों पर मुहैया करती है। 

लेकिन अगर आप का क्रेडिट स्कोर बुरा है तो आपको किसी भी संस्था या बैंक से लोन प्राप्त करने में कठिनाई हो सकती है। साथ ही आपको अधिकतम ब्याजदरों के साथ लोन चुकाने के लिए तैयार रहना पड़ेगा।

क्रेडिट स्कोर कैसे प्रभावित करता है?

आप को पता है की क्रेडिट स्कोर हमारे वित्तीय व्यवहार को दर्शाती है, हमें लोन देनेवाली निजी संस्था या बैंक इसी आधारपर हमारा आकलन करती है, और यह जानती है की हम उनके द्वारा दिए गये लोन को सही समय में या बिना त्रासदी के चूका सकते है या नहीं। हमारी विश्वसनीयता को बढ़ाने या कम करने का काम हमारे क्रेडिट स्कोर पर ही डिपेंड है। इसलिए हमें सजग होना पड़ेगा। और हमारे क्रेडिट स्कोर को बढ़ाने की तरफ ध्यान देना पड़ेगा। 

हमारा क्रेडिट स्कोर किस तरह से हमें प्रभावित करता है यह जानना काफी महत्वपूर्ण है।

पर्सनल लोन पर क्रेडिट स्कोर का प्रभाव :- मुख्यतः पर्सनल लोन पर हमें क्रेडिट स्कोर का सबसे ज्यादा प्रभाव दिखाई देता है, क्यों की पर्सनल लोन असुरक्षित केटेगरी में वर्गीकृत है। जिसमें जोखिम बढ़ जाता है। ऐसे में अगर आपका क्रेडिट स्कोर कम है या बुरा है तो ऐसे में आपका पर्सनल लोन का आवेदन ख़ारिज होने की सम्भावना बढ़ जाती है। या फिर कठिन शर्तों और अधिक ब्याजदरों के साथ आपको लोन प्राप्त होता है। 

लेकिन आपका क्रेडिट स्कोर अच्छा या सर्वोत्तम है तो ऐसे में सरलता से आप को लोन सुविधा मिल जाती है साथ ही अधिक लोन प्राप्त करने में आप सक्षम होते है। आकर्षक ब्याजदरों के साथ अधिक समय सीमा प्राप्त करने में भी आप सफल हो पाते है।

कार लोन पर क्रेडिट स्कोर का प्रभाव :- कार खरीदते वक्त आप को लोन की आवश्यकता है और आप का क्रेडिट स्कोर कम है तो आपको दिक्कत हो सकती है, क्यों की क्रेडिट स्कोर कम होने के कारण आपको कम लोन ऑफर होगा उच्च ब्याजदरों के साथ, याने आपको कार खरीदते वक्त अधिक राशी का भुगतान करना अनिवार्य हो जाएगा। 

लेकिन यदि आपका क्रेडिट स्कोर अच्छा है या सर्वोत्तम है तो फिर आप को 0 % भुगतान पर भी लोन ऑफर हो जायेगा। वह भी आकर्षक ब्याजदरों के साथ।

क्रेडिट कार्ड पर क्रेडिट स्कोर का प्रभाव :- अधिक क्रेडिट का लाभ उठाने के लिए जरुरी है की आपका क्रेडिट स्कोर अच्छा हो। अगर क्रेडिट स्कोर अच्छे से सर्वोत्तम की और बढ़ रहा है तो आप रिवॉर्ड के साथ कम ब्याजदरों और अनुकूल शर्तों पर क्रेडिट कार्ड प्राप्त कर सकते है।

अपना क्रेडिट रिपोर्ट कैसे देखे?

क्रेडिट रिपोर्ट देखना सरल और आसान प्रक्रिया है, कई तरह की कंपनिया आप को अपना क्रेडिट स्कोर चेक करने की अनुमति देते है। अपना CIBIL स्कोर ( क्रेडिट स्कोर) देखने के लिए  आपको कुछ स्टेप्स फॉलो करने होंगे। 

  •  सब से पहले आपको cibil.com पर जाना होगा, और sign up करना होगा।
  • इसके बाद आपको GET FREE CIBIL SCORE & REPORT पर क्लिक करना होगा।
  • इसके बाद अपने सामने एक फॉर्म ओपन होगा जहाँ पर आपको अपने ईमेल ID के साथ रजिस्ट्रेशन करना होगा। 
  • अगर आपका पहले से ही अकाउंट बनाया है तो आप डायरेक्ट लॉग इन कर सकते है।
  • लॉग इन करने के बाद MY ACCOUNT पर आपको अपना क्रेडिट स्कोर मिल जाएगा। 

उपरोक्त जानकारी में हमने बताया है की, क्रेडिट स्कोर की लिमिट 300 और 900 के बीच होती है।जहाँ 900 और उसके करीब जो स्कोर होता है उसे अमूमन एक सर्वोत्तम स्कोर माना जाता है और यह किसी व्यक्ति को अधिक अनुकूल शर्तों पर क्रेडिट सुरक्षित करने में सक्षम बनाता है क्योंकि यह जिम्मेदार क्रेडिट बिहेवियर को दर्शाता है। सामान्य क्रेडिट स्कोर लिमिट नीचे दी गई है:

अ.क्र.क्रेडिट स्कोर स्थिति क्रेडिट स्कोर 
.ख़राब 300-579
.संतोषजनक 580-669
.अच्छा 670-739
.बहुत अच्छा 740-799
.सर्वोत्तम 780-850

अपने क्रेडिट स्कोर को बढ़ाने के लिए हमें क्या करना चाहिए?

हमारे वित्तीय व्यवहार में पारदर्शकता रखना :- क्रेडिट स्कोर बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण है की हमारे वित्तीय लेनदेन के व्यवहार सरल और पारदर्शी हो। साथ ही हमें लोन के EMI को निर्धारित समय पर भरना आवश्यक है। जिस से हम अपनी वित्तीय साख बढ़ा सकते है। जिस से क्रेडिट स्कोर पर सकारात्मक असर पड़ता है।

अधिक आवेदनों से बचना होगा :- जब भी हम लोन या क्रेडिट कार्ड के आवेदन का प्रस्ताव भेजते है तब हार्ड इंक्वायरी होती है, ज्यादा आवेदन का मतलब है की ज्यादा हार्ड इंक्वायरी, जो हमारे क्रेडिट स्कोर पर नकारात्मक प्रभाव डालती है। इस से हमें बचना चाहिए।

बैंक के निर्देश पर क्रेडिट लिमिट बढ़ाएं :- अगर आपका बैंक क्रेडिट लिमिट बढ़ाने को कहता है तो उसे जरुर बढ़ाएं। लेकिन इसके साथ ही यह ध्यान रखें की आपके खर्चे उसके साथ ज्यादा ना बढ़ें। जब कम खर्चों के साथ क्रेडिट लिमिट बढ़ता है तो यह आपके क्रेडिट स्कोर पर सकारात्मक प्रभाव डालता है।

क्रेडिट यूटिलाइजेशन रेश्यो कम रखें :-  यह महत्वपूर्ण है की अपने क्रेडिट कार्ड का यूटिलाइजेशन रेश्यो कम रखें। याने लगभग 30% तक। और ध्यान दें की यह उसके ऊपर ना जाएँ। यह आपके क्रेडिट स्कोर पर सकारात्मक असर डालने में सक्षम होता है।

अपने क्रेडिट रिपोर्ट की नियमित जाँच करना :- यह जरुरी इसलिए है ताकि गलत सुचना या धोखाधड़ी के चलते या फिर कुछ कमियों की वजह से गलत जानकारी दर्ज होना आपके लिए हानिकारक हो सकता है जो आपके क्रेडिट स्कोर पर सीधा असर करता है। इसलिए अपने क्रेडिट रिपोर्ट पर नजर बनाये रखना भी महत्वपूर्ण कदम है।

हमारे लिए अच्छे क्रेडिट स्कोर के क्या फायदे है?

उपरोक्त आर्टिकल में हमने क्रेडिट स्कोर के कई फायदों के बारे में चर्चा की ही है, फिर भी हम कुछ प्रमुख फायदों की बात करते है, जैसे 

आसानी से लोन मिल जाना :- आपका क्रेडिट स्कोर आपका वित्तीय लेनदेन के व्यवहार के बारे में बताता है, उधारकर्ता के रूप में आपका रिकॉर्ड कैसा है? यह आसानी से जाना जा सकता है। यदि आपका क्रेडिट स्कोर अच्छा है तो आपको आसानी से किसी भी बैंक या प्राइवेट लोन देनेवाली कंपनियों से कम ब्याज दर पर लोन मिल जाता है। 

आसानी से क्रेडिट कार्ड प्राप्त होना :- अच्छा क्रेडिट स्कोर आपके वित्तीय व्यवहार की पारदर्शकता को दर्शाता है। जिस से आपको कई फाइनेंस कंपनियों और बैंकों के क्रेडिट कार्ड के कई विकल्प उपलब्ध हो जाते हैं, और आसानी से मिल भी जाते है।

हाई क्रेडिट लिमिट वाले क्रेडिट कार्ड के लिए निवेदन कर सकते है :- अगर आप हाई क्रेडिट लिमिट वाले क्रेडिट कार्ड लेना चाहते हैं तो इसमें भी आपका अच्छा क्रेडिट स्कोर आपके काम आता है। एक अच्छे स्कोर के साथ, आपके पास हाई क्रेडिट लिमिट के लिए आवेदन करने का ऑप्शन रहता है।

आसानी से लोन ट्रान्सफर करवाना :-  अच्छा क्रेडिट स्कोर का एक और फायदा आपको होता है। वह है  अगर किसी वजह से आप किसी एक बैंक से दूसरे बैंक में लोन ट्रांसफर करवाना चाहते है तो आपको ज्यादा मशक्कत नहीं करनी पडती। अगर आपका क्रेडिट स्कोर अच्छे से सर्वोत्तम की ओर बढ़ रहा है तो आसानी से आप अपना लोन ट्रान्सफर करवा सकते है।

सम्बन्धित सवाल (FAQ)

सिबिल स्कोर क्या है?

जवाब :- रिज़र्व बैंक अनुमोदित क्रेडिट इंफॉर्मेशन ब्यूरो (इंडिया) लिमिटेड (CIBIL) कम्पनी व्यक्तिगत क्रेडिट स्कोर का निर्धारण करती है, उसे क्रेडिट स्कोर या सिबिल स्कोर कहाँ जाता है। जो भारतीय वित्तीय बाजार में एक महत्वपूर्ण प्रमाणक है। 

सिबिल स्कोर कितने दिन में अपडेट होता है?

जवाब :- वैसे तो क्रेडिट या सिबिल स्कोर को अपडेट करने की समय सीमा का निर्धारण उन्हीं संस्थाओं के पास होता है जो इसे जारी करते है और वह अलग-अलग हो सकती है, लेकिन आमतौर पर 30 से 45 दिनों में, या वित्तीय ट्रांजैक्शन के आधार पर जब नई जानकारी सिबिल ब्यूरो को पहुंचती है, तब सिबिल स्कोर अपडेट होता है।

क्रेडिट स्कोर कितना होना चाहिए?

जवाब :- हमारे देश में सिबिल स्कोर एक प्रमुख क्रेडिट स्कोर है जिसका मानक अंक 300 से 900 तक होता है। विशिष्ट संख्या का आकलन करें तो 750 क्रेडिट स्कोर बहुत अच्छा माना जाता है। लेकिन एक उधारकर्ता के रूप में हमारे लिए क्रेडिट स्कोर कितना होना चाहिए यह वो संस्था तय करती है जो हमें लोन उपलब्ध करवाती है। 

क्या मेरे पास 900 क्रेडिट स्कोर हो सकता है?

जवाब :- हाँ, यह संभव हो सकता है, क्यों की हमारे देश में सिबिल स्कोर या क्रेडिट स्कोर की अधिकतम सीमा 900 है। इसलिए, इस सम्भावना को ख़ारिज नहीं किया जा सकता।

क्रेडिट स्कोर कितने अंक होता है?

जवाब :- क्रेडिट स्कोर एक मानक संख्या है जो तिन अंकों की होती है। लाइसेंस प्राप्त क्रेडिट ब्यूरो  (जैसे सिबिल, एक्सपीरियन, इक्विफैक्स, CRIF) द्वारा जारी किया जाता है। जिसमें न्यूनतम 300 से लेकर अधिकतम 900 तक स्कोर होता है।

क्या क्रेडिट स्कोर शून्य हो सकता है?

जवाब :- नहीं, क्रेडिट स्कोर कभी भी शून्य नहीं हो सकता। यदि किसी व्यक्ति का क्रेडिट स्कोर सबसे कम होगा तो वह 300 होगा, क्यों की यह सबसे कम संख्यात्मक मान है। हालांकि, यदि किसी व्यक्ति की किसी भी तरह की क्रेडिट हिस्ट्री मौजूद नहीं है। ऐसे स्थिति में उस व्यक्ति का क्रेडिट स्कोर “NA” या “NH” हो सकता है।

संबोधन 

आशा करते है, उपरोक्त आर्टिकल में “क्रेडिट स्कोर क्या होता है?” (What is a credit score in hindi) से लेकर सभी सम्बन्धित जानकारी आप के लिए पर्याप्त साबित होगी। यदि फिर भी आपके मन में क्रेडिट स्कोर से सम्बन्धित कुछ सवाल है तो आप हमें कमेंट के माध्यम से पूछ सकते है।

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